झबरेडा 3 मार्च। कई रोज से तेज हवाएं चलने पर किसानो द्वारा उगाई गई गेहूं की फसल धराशाही होती जा रही है जिससे किसानों को गेहूं की फसल में मुनाफे की जगह नुकसान होता नजर आ रहा है जिससे किसान को गेहूं की फसल को लेकर चिंता बढी हुई है।

कस्बा झबरेड़ा व ग्रामीण क्षेत्र निवासी किसान गुड्डू वर्मा, राजपाल, यशवीर, कपिल सैनी ,रोहताश, कुलदीप, प्रदीप, सुखपाल, योगेश त्यागी, प्रमोद, बीरम सिंह आदि का कहना है कि किसान के भाग्य की लकीरें मौसम की मेहरबानी पर टिकी होती हैं,परंतु पिछले कुछ दिनों से चल रही तेज हवाओं के चलते क्षेत्र में गेहूं की फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है। तैयार फसल के इस हाल को देखकर किसानों की आंखों में आंसू हैं। किसानों ने हाल ही में अपनी गेहूं की फसल की अंतिम या दूसरी सिंचाई की जा रही हैं। सिंचाई के तुरंत बाद चली तेज हवाओ से गेहूं की फसल धराशाही हो गई हैं। फसल जमीन पर गिरने और पानी के संपर्क में रहने से गेहूं की बालियों में दाना काला पड़ने का डर है। वहीं किसानों का कहना है कि गिरी हुई फसल में दाना पूरी तरह पुष्ट नहीं हो पाता, जिससे उत्पादन में 25% से 40% तक की कमी आ सकती है और फसल की कटाई मशीनों से संभव भी नहीं होगी, जिससे किसानों को मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि हमने दिन-रात एक करके फसल पाली थी। खाद, बीज और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए। अब जब फसल घर आने का समय नजदीक आता जा रहा है, तो प्रकृति फसल को बर्बाद कर रही है सरकार को किसान की सुध लेनी चाहिए। वे पहले ही बढ़ती लागत से परेशान हैं, और अब इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी है। जो किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।





