देहरादून 2 अप्रैल। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के समस्त राजकीय और निजी स्कूलों की समय-सारिणी में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। सचिव रविनाथ रामन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन सत्रों के लिए स्कूलों के संचालन का समय नए सिरे से निर्धारित किया गया है।

नया आदेश प्रदेश के माध्यमिक एवं प्रारम्भिक दोनों स्तर के विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। शासन द्वारा जारी नई तालिका के अनुसार, शैक्षणिक सत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है ग्रीष्मकालीन समय 01 अप्रैल से 30 सितम्बर तक होगा और शीतकालीन समय 01 अक्टूबर से 31 मार्च तक होगा। नये समय-चक्र में गतिविधि ग्रीष्मकालीन प्रार्थना सभा 20 मिनट प्रातः 07:45 से 08:05 शीतकालीन प्रार्थना सभा 20 मिनट प्रातः 08:50 से 09:10 तक होगी।ग्रीष्मकालीन प्रथम वादन प्रातः 08:05 से 08:45 शीतकालीन प्रथम वादन प्रातः 09:10 से 09:50 तक होगा। ग्रीष्मकालीन द्वितीय वादन प्रातः 08:45 से 09:25 शीतकालीन द्वितीय वादन प्रातः 09:50 से 10:30 तक होगा। ग्रीष्मकालीन तृतीय वादन प्रातः 09:25 से 10:05 शीतकालीन तृतीय वादन प्रातः 10:30 से 11:10 तक होगा।ग्रीष्मकालीन चतुर्थ वादन प्रातः 10:05 से 10:45 शीतकालीन चतुर्थ वादन प्रातः 11:10 से 11:50 तक होगा।ग्रीष्मकालीन मध्यान्तर प्रातः 10:45 से 11:25 शीतकालीन मध्यान्तर प्रातः 11:50 से दोपहर 12:30 तक होगा।ग्रीष्मकालीन पंचम वादन प्रातः 11:25 से दोपहर 12:05 शीतकालीन पंचम वादन दोपहर 12:30 से अपराह्न 01:10 तक होगा। ग्रीष्मकालीन षष्ठम वादन दोपहर 12:05 से 12:45 अपराह्न शीतकालीन षष्ठम वादन दोपहर 01:10 से 01:50 तक होगा। ग्रीष्मकालीन सप्तम वादन दोपहर 12:45 से अपराह्न 01:25 शीतकालीन सप्तम वादन अपराह्न 01:50 से 02:30 तक होगा। ग्रीष्मकालीन अष्टम वादन अपराह्न 01:25 से 02:05 शीतकालीन अष्टम वादन अपराह्न अपराह्न 02:30 से 03:10 तक होगा। प्रत्येक क्लास वादन की अवधि 40 मिनट और लंच ब्रेक की अवधि भी 40 मिनट निर्धारित की गई है। यह नया आदेश 28 अगस्त, 2018 के पुराने शासनादेश में आंशिक संशोधन करता है। पुराने आदेश की अन्य शर्तें पहले की तरह ही प्रभावी रहेंगी। यह निर्णय निदेशक, अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण सीमैट के प्रस्ताव पर विचार करने के उपरांत लिया गया है। इस बदलाव से प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की दिनचर्या में बदलाव आएगा। विशेष रूप से शीतकाल में स्कूल देरी से शुरू होने से पर्वतीय क्षेत्रों के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा को इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।





