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झबरेड़ा 20 मार्च। कस्बा झबरेड़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में शुक्रवार सुबह से लगातार जारी रिमझिम बारिश ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। पहले से ही प्रकृति की मार झेल रहे किसानों के लिए यह बारिश आफत बनकर बरस रही है, जिससे तैयार खड़ी गेहूं और सरसों की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है।

झबरेडा क्षेत्र के खेतों में इस समय गेहूं और सरसों की फसलें पककर तैयार खड़ी हैं। कई किसानों ने सरसों की कटाई शुरू कर दी थी और कटी हुई फसल सूखने के लिए खेतों में ही छोड़ी गई थी। लगातार पानी पड़ने से अब फसल के सड़ने और दाना काला पड़ने का खतरा बढ़ गया है। बीते 15 मार्च को हुई बारिश और तेज हवाओं ने पहले ही गेहूं की फसल को खेतों में बिछा दिया था। शुक्रवार की बारिश ने रही-सही कसर पूरी कर दी है, जिससे दाना हल्का होने और पैदावार घटने का डर है। बारिश के कारण खेतों में जलभराव और नमी होने से वर्तमान में चल रही गन्ने की बुवाई का काम भी पूरी तरह रुक गया है। क्षेत्रीय किसान अमित कुमार, राजेंद्र सिंह, बिट्टू चौधरी, सुमित कुमार, बाबूराम, शमशाद मलिक और जयवीर सिंह ,राजपाल ,लोकेश,अनुज ने अपना दुख साझा करते हुए कहा कि अब खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। किसानों ने उत्तराखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। बिजली के बिलों में लगातार हो रही वृद्धि से किसानों का आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के समय मिलने वाली सरकारी सहायता भी नगण्य है। युवा पीढ़ी अब खेती से किनारा कर रही है क्योंकि इसमें कोई भविष्य नहीं दिख रहा। अगर केंद्र और राज्य सरकार ने समय रहते कृषि क्षेत्र की सुध नहीं ली, तो इसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना होगा। किसानों का मानना है कि खेती में बढ़ती लागत और प्रकृति की अनिश्चितता के कारण ग्रामीण युवा वर्ग अब खेतों में कदम रखना तक पसंद नहीं कर रहा है और नौकरियों की तलाश में पलायन को मजबूर है। यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है। वही लगातार बारिश होने से गन्ना कोल्हू में गुड बनाने का काम भी प्रभावित हुआ है।





