
देहरादून 11 मार्च। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान किसानों के मुद्दे पर सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। खानपुर विधायक उमेश कुमार और झबरेड़ा विधायक वीरेंद्र जाती ने किसानों को मुफ्त बिजली देने की मांग को लेकर सदन के वेल में आकर जोरदार प्रदर्शन किया।

उत्तराखंड विधानसभा के चालू सत्र में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार और झबरेड़ा से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाती ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दोनों विधायकों ने प्रदेश के किसानों के लिए मुफ्त बिजली की मांग करते हुए सदन के वेल में जाकर धरना दिया और नारेबाजी की। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, उमेश कुमार और वीरेंद्र जाती ने किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोसी राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश और हरियाणा) की तुलना में उत्तराखंड के किसानों को बिजली की दरों और सुविधाओं में राहत नहीं मिल रही है। विधायकों का तर्क था कि उत्तराखंड एक ऊर्जा प्रदेश है, फिर भी यहाँ का किसान महंगे बिलों के नीचे दबा जा रहा है। उन्होंने मांग की कि खेती के लिए बिजली पूरी तरह मुफ्त की जाए। विपक्ष और निर्दलीय विधायकों के इस आक्रामक रुख के कारण सदन की कार्यवाही में काफी व्यवधान आया। विधानसभा अध्यक्ष के बार-बार अनुरोध के बावजूद विधायक वेल से हटने को तैयार नहीं हुए। विधायक वीरेंद्र जाती ने कहा कि जब उत्तराखंड स्वयं बिजली पैदा करता है, तो इसका सीधा लाभ यहाँ के अन्नदाता को मिलना चाहिए। गन्ने के भुगतान में देरी और बिजली के बढ़ते बिलों के कारण किसान कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है। अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड में भी कृषि क्षेत्र को विशेष रियायतें दी जानी चाहिए। सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों को राहत दे रही है, लेकिन जो किसान पूरे प्रदेश का पेट भरता है, उसे अंधेरे में रखा जा रहा है। जब तक किसानों को मुफ्त बिजली का हक नहीं मिलता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। सत्ता पक्ष की ओर से मंत्रियों ने कहा कि सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और विभिन्न सब्सिडी योजनाओं के माध्यम से राहत दी जा रही है। हालांकि, वेल में हुए हंगामे के कारण सदन को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा।




