झबरेड़ा 19 अप्रैल। कस्बा स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को 51वाँ वार्षिक महोत्सव बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर हवन-यज्ञ और प्रवचनों के माध्यम से वेदों के प्रचार-प्रसार और समाज सेवा पर बल दिया गया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है जब वह अधर्म का मार्ग त्याग कर धर्म के पथ पर चले। उन्होंने महाभारत के युद्ध का जिक्र करते हुए बताया कि वह धर्म की स्थापना के लिए लड़ा गया सबसे बड़ा युद्ध था, जिसमें करोड़ों लोगों ने अपना बलिदान दिया। बढ़ती गर्मी को देखते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी छतों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें और गांव के गरीब परिवारों की मदद के लिए सदैव तैयार रहें। कार्यक्रम में पहुंचे प्रसिद्ध भजनोपदेशक ऋषिपाल पथिक ने आर्य समाज के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सन 1875 में महर्षि दयानंद सरस्वती ने तब आर्य समाज की नींव रखी थी, जब देश गुलामी और कुरीतियों में जकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने मूर्ति पूजा के बजाय वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया और विदेशों तक आर्य समाज का ध्वज फराया। प्रवचनों के दौरान हवन यज्ञ के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व को भी समझाया गया। वक्ताओं ने बताया कि हवन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री और देशी घी के धुएं से वातावरण के हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं और पर्यावरण शुद्ध होता है। मान्यताओं के अनुसार, यज्ञ की आहुतियां देवताओं को प्राप्त होती हैं, जिससे घर-परिवार और समाज में सुख-समृद्धि एवं शांति का वास होता है। महोत्सव का आयोजन आर्य समाज के अध्यक्ष चौधरी बिरम सिंह के नेतृत्व में हुआ।


इस दौरान मुख्य रूप से ऋषिपाल वर्मा, बबलू आर्य, सुबोध कुमार यश मोद, चौधरी अंश कुमार, रविंद्र सिंह बिट्टू चौधरी प्रवीण कुमार, अरविंद कुमार, उमा देवी प्रदीप कुमार, सचिन कुमार, ममता देवी और शिव कुमार आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया और समाज की सेवा का संकल्प लिया गया।




