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झबरेड़ा, 31 अगस्त। कस्बा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान की पकने को तैयार फसल पर मच्छर रोग का प्रकोप बढ़ने से किसान परेशान हैं। रोग के कारण खेतों में खड़ी तैयार धान की फसल गिरने लगी है। किसानों का कहना है कि रोग की रोकथाम के लिए दो-तीन बार दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद मच्छर का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। इससे किसानों को फसल खराब होने और आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्र के किसान राजवीर सिंह, यशवीर सिंह, प्रदीप कुमार, भोला सिंह, राजपाल सिंह, कुंवर पाल, सुलेमान मलिक, बालू अहमद, सोराज सिंह आदि ने बताया कि इस समय धान की फसल पकने की स्थिति में है। कई खेतों में फसल आधी पक चुकी है। इसी दौरान फसल में मच्छर का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे धान के पौधे कमजोर होकर धरती पर गिरने लगे हैं। किसानों के अनुसार उन्होंने मच्छर रोग से फसल को बचाने के लिए स्थानीय बीज भंडारों से दवाएं खरीदकर दो से तीन बार छिड़काव किया, लेकिन इसके बाद भी रोग पर नियंत्रण नहीं हो सका। किसानों ने दवाओं के असर न करने पर उनके नकली अथवा गुणवत्ताहीन होने का अंदेशा जताया है। किसानों का आरोप है कि कस्बे में करीब 15 बीज भंडार एवं कृषि दवा की दुकानें हैं, जहां फसलों में रोग लगने पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं बेची जाती हैं। किसानों ने कृषि विभाग से इन दुकानों पर दवाओं की गुणवत्ता की जांच कराने और यदि नकली दवा की बिक्री पाई जाए तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कस्बे और आसपास के गांवों में कृषि दवा विक्रेताओं की दुकानों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित जांच नहीं की जाती। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की ओर से दुकानदारों को खुली छूट मिलने के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मामले में जिला कृषि अधिकारी का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन घंटी जाने के बावजूद फोन रिसीव नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि उन्होंने भी अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इससे किसानों में रोष है। किसानों ने जिलाधिकारी और कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर खेतों में फसल की जांच कराने तथा कृषि दवाओं के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।





