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झबरेडा 28 मई। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। करीब 28 किलोमीटर लंबी देवबन्द–रुड़की नई रेलवे लाइन पर सीआरएस निरीक्षण हुए एक साल से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक इस रूट पर आम यात्रियों के लिए कोई नियमित पैसेंजर या एक्सप्रेस ट्रेन शुरू नहीं की जा सकी है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट का पूरा लाभ न मिलने से स्थानीय जनता और रेल यात्रियों में भारी निराशा है।

देवबन्द–रुड़की नई रेलवे लाइन के निर्माण का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के देवबन्द और उत्तराखंड के रुड़की के बीच की दूरी को कम करना था। इस लाइन के शुरू होने से ट्रेनों को अब सहारनपुर–टपरी होकर लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता, जिससे समय और रेलवे के परिचालन दोनों की बड़ी बचत हो रही है। फिलहाल, इस रूट से नंदा देवी एक्सप्रेस और कुछ चुनिंदा स्पेशल ट्रेनें गुजर तो रही हैं, लेकिन वे बीच के स्टेशनों पर नहीं रुकतीं। इस नई रेल लाइन पर दो महत्वपूर्ण स्टेशन बन्हेड़ा खास और झबरेड़ा बनाए गए हैं। विभागीय उदासीनता के कारण इन नए स्टेशनों के आस-पास रहने वाले हजारों ग्रामीणों और स्थानीय यात्रियों को आज भी रेल सुविधा की उम्मीद में हाथ मलना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उत्तर रेलवे का मुरादाबाद मंडल इस रूट को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। जिन लोगों को इस परियोजना से बेहतर भविष्य और सुलभ यातायात की उम्मीद थी, वे आज भी नई ट्रेन सेवाओं का इंतजार कर रहे हैं। इस रूट से नई एक्सप्रेस, मेमु या पैसेंजर ट्रेनें चलाई जाएं, ताकि यात्रियों को कम दूरी और कम समय का वास्तविक लाभ मिल सके। कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को सहारनपुर-टपरी के बजाय इस नई लाइन से निकाला जाए, जिससे सहारनपुर सेक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और इस नई लाइन का सही उपयोग हो सकेगा। यह केवल 28 किलोमीटर का ट्रैक नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच भविष्य की मजबूत रेल कनेक्टिविटी का मुख्य जरिया है। अब जरूरत इस बात की है कि भारतीय रेलवे और मुरादाबाद मंडल इस मुद्दे को गंभीरता से लें और देवबन्द–रुड़की नई लाइन पर जल्द से जल्द नियमित यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू कर स्थानीय जनता को उनका हक दें।





