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झबरेड़ा, 11 सितंबर। इकबालपुर से लखनौता तक पुहाना-गुरुकुल मार्ग के दोनों ओर खड़े सूखे और जर्जर पेड़ राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं। सड़क किनारे खड़े इन पेड़ों से कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। मार्ग से प्रतिदिन साइकिल, बाइक, कार, ट्रैक्टर-ट्राली सहित बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में पेड़ या उनकी सूखी शाखाएं सड़क पर गिरने से जान-माल का नुकसान हो सकता है।

क्षेत्रीय लोगों के अनुसार बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ गया है। लगातार बारिश के कारण जमीन गीली हो जाती है, जिससे कमजोर और सूखे पेड़ों के उखड़कर सड़क पर गिरने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा तेज हवा और आंधी के दौरान सूखी शाखाएं टूटकर राहगीरों और वाहनों पर गिर सकती हैं। सड़क से गुजरने वाले लोगों को हर समय पेड़ों के नीचे से निकलते समय हादसे की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सड़क के दोनों ओर खड़े सूखे पेड़ों की समय रहते पहचान कर उन्हें हटाया जाना बेहद जरूरी है। यदि किसी तेज आंधी या बारिश के दौरान पेड़ सड़क पर गिर गया तो यातायात बाधित होने के साथ ही किसी वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि विभागीय टीम मौके पर पहुंचकर सड़क किनारे खड़े सूखे और जर्जर पेड़ों का निरीक्षण करे और खतरा बने पेड़ों को नियमानुसार हटाने की कार्रवाई करे। क्षेत्रीय निवासी कपिल, गोपाल सिंह, अर्जुन सिंह, अनुज, अमित, योगेश, रोहतास, अभय, इसरार, पप्पू ठेकेदार, संदीप, बलवीर, सोनू आदि का कहना है कि राहगीर जब इस मार्ग से अपने गंतव्य की ओर जाते हैं तो उन्हें सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों के गिरने का डर बना रहता है। बरसात के मौसम में जमीन नरम होने के कारण पेड़ों के गिरने का खतरा अधिक रहता है। ग्रामीणों ने कहा कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय विभाग को पहले ही एहतियाती कदम उठाने चाहिए। वन विभाग के रेंजर महेंद्र गिरी ने बताया कि सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों की जांच कराई जाएगी। जांच के आधार पर इस मामले में जल्द संज्ञान लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस संबंध में विभाग को पत्र देता है तो नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सकती है।





