झबरेड़ा, 4 जून। झबरेड़ा से सहारनपुर मार्ग पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई ग्रामीण बस सेवा विवादों के घेरे में आ गई है। इस मार्ग पर वर्षों बाद दोबारा बस सेवा शुरू होने से जहां एक ओर स्थानीय जनता में खुशी का माहौल था, वहीं दूसरी ओर अब स्थानीय टेंपो चालकों द्वारा इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है। चालकों के बीच बढ़ते इस विवाद के कारण क्षेत्र की जनता को डर है कि कहीं इस नई बस सेवा पर फिर से ग्रहण न लग जाए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के समय इस मार्ग पर कई सरकारी बसें चला करती थीं। लेकिन उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद इस रूट की सभी बसें बंद हो गई थीं। बसें बंद होने के बाद यात्रियों की सुविधा के लिए इस मार्ग पर टेंपो चलने शुरू हो गए, जो पिछले कई वर्षों से परिवहन का मुख्य साधन बने हुए हैं। लगभग एक महीना पहले जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मार्ग पर दोबारा ग्रामीण बस सेवा की शुरुआत की, तो टेंपो चालकों में हड़कंप मच गया। टेंपो चालकों का तर्क है कि बस चलने से उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है और उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसी बात को लेकर अब दोनों पक्षों के बीच सीधा टकराव और विरोध पैदा हो गया है। इस पूरे विवाद पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि झबरेड़ा-सहारनपुर मार्ग पर चलने वाले चाहे टेंपो हों या बसें, वर्तमान में किसी के पास भी इस मुख्य मार्ग पर चलने का वैध परमिट नहीं है।कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो बस इस मार्ग पर चलाई जा रही है, उसका परमिट असल में ‘सहारनपुर-बीरपुर जाटोल-मझौल’ रूट का है। इस परमिट में कस्बा झबरेड़ा का कोई नाम दर्ज नहीं है। इसलिए नियमों के अनुसार, बस को उसी रूट पर चलाया जाए जिसका परमिट बना है। इसके साथ ही इस मार्ग पर दौड़ रहे टेंपो चालकों को भी अपना वैध परमिट बनवाना होगा। पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि रूट और परमिट के नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोतवाली प्रभारी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी भी पक्ष ने क्षेत्र की शांति व्यवस्था को खराब करने का प्रयास किया, तो उनके खिलाफ कानून के तहत बेहद कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।





