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झबरेड़ा, 17 अगस्त। कस्बा व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भगवान गोगावीर के राजस्थान स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाने के लिए सोमवार को 10 श्रद्धालु नंगे पैर पीले वस्त्र धारण कर ढोल-नगाड़ों के साथ रवाना हुए। श्रद्धालुओं के रवाना होने से पहले कस्बे में स्थित गोगावीर महाड़ी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।

झबरेड़ा कस्बा व आसपास के क्षेत्र से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित भगवान गोगा जाहरवीर के मंदिर में पूजा-अर्चना और प्रसाद चढ़ाने के लिए जाते हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और युवा भी शामिल होते हैं। मान्यता के अनुसार श्रद्धालु सावन माह की तीज के दिन अपने घर पर निशान खड़ा कर पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर के लिए रवाना होते हैं। कस्बे में स्थित गोगा जाहरवीर महाड़ी के भगत रामकुमार कश्यप ने बताया कि मान्यता है कि कई सौ वर्ष पूर्व बागड़ देश, जिसे वर्तमान में राजस्थान कहा जाता है, के हनुमानगढ़ जिले की एक रियासत में भगवान गोगा जाहरवीर का जन्म हुआ था। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि वर्तमान में जहां उनका मंदिर स्थित है, वहां भगवान गोगावीर अपने नीले घोड़े सहित धरती में समा गए थे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु भगवान गोगा वीर से मनोकामना मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को राजस्थान स्थित गोगा वीर मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। श्रद्धालु नंगे पैर यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं और वहां पूजा-अर्चना करते हैं। तीन दिन बाद श्रद्धालुओं के वापस लौटने पर घर में विशेष भोज का आयोजन किया जाता है, जिसे कंदूरी कहा जाता है। इस दौरान रिश्तेदारों और अन्य श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाता है। कंदूरी में भगवान गोगावीर की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। इसके साथ ही तीन दिनों तक घर पर ढोल-नगाड़ों के साथ गोगावीर की पूजा-अर्चना करने की परंपरा भी निभाई जाती है।





