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झबरेड़ा, 18 अगस्त। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने मंगलवार को रुड़की और झबरेड़ा क्षेत्र के विभिन्न थोक एवं फुटकर मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दवाओं के क्रय-विक्रय अभिलेख, एक्सपायरी दवाओं का रखरखाव, फार्मासिस्ट की उपस्थिति, कोल्ड चेन वाली दवाओं के भंडारण तथा नारकोटिक एवं साइकोट्रॉपिक दवाओं की बिक्री की जांच की गई। गंभीर कमियां मिलने पर आठ मेडिकल स्टोरों का क्रय-विक्रय तत्काल प्रभाव से रोकते हुए लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की गई।

अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड ताजबर जग्गी के निर्देशन तथा उप औषधि नियंत्रक हेमंत नेगी के नेतृत्व में गठित टीम में औषधि निरीक्षक हरीश सिंह, हार्दिक भट्ट और अमित कुमार आजाद शामिल रहे। टीम ने रुड़की और झबरेड़ा के विभिन्न दवा प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण की सूचना मिलते ही कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों में खलबली मच गई। बताया गया कि कुछ संचालक दुकानें बंद कर मौके से चले गए। बंद मिले एक मेडिकल स्टोर पर टीम ने सील लगाने की कार्रवाई शुरू की, इसी दौरान संचालक मौके पर पहुंच गया। निरीक्षण के बाद उसे व्यवस्थाओं में सुधार के लिए समय दिया गया।टीम ने मेडिकल स्टोरों पर दवाओं के रखरखाव और साफ-सफाई की भी जांच की। कुछ दुकानों पर दवाओं पर धूल-मिट्टी पाई गई। अधिकांश संचालकों के दस्तावेज सही मिले, जबकि कुछ के कागजात अधूरे पाए गए। उन्हें आवश्यक दस्तावेज पूरे करने के निर्देश दिए गए। मेडिकल स्टोरों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की गई।नारकोटिक एवं साइकोट्रॉपिक दवाओं की बिक्री पर विशेष निगरानी रखते हुए संचालकों को बिना वैध चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन के शेड्यूल्ड एवं नारकोटिक दवाओं की बिक्री नहीं करने के सख्त निर्देश दिए गए। टीम ने एनडीपीएस एक्ट, 1985 तथा औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत रखे जाने वाले रजिस्टर, बिल बुक और स्टॉक का भी परीक्षण किया। टीम ने मेडिकल स्टोर संचालकों को 24 घंटे आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।





