झबरेड़ा 21 अप्रैल। गर्मी की दस्तक के साथ ही झबरेड़ा कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट गहरा गया है। क्षेत्र में रोजाना 8 घंटे से भी अधिक की कटौती की जा रही है, जिससे लगभग 50 हजार की आबादी त्रस्त है। बिजली न होने से जहाँ आम जनमानस भीषण गर्मी और मच्छरों से परेशान है, वहीं किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, ऊर्जा निगम की मनमानी के कारण सुबह 4:00 बजे ही आपूर्ति ठप हो जाती है, जो सुबह 7:00 बजे के बाद ही बहाल होती है। इसी तरह, शाम 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक बिजली गुल रहने से लोगों के दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कस्बे के चौधरी बिरम सिंह, सुलेमान मलिक, सुखबीर सिंह, और इंद्रेश कुमार सहित दर्जनों लोगों का कहना है कि बिजली आने के बाद भी ‘आंख-मिचौली’ का खेल जारी रहता है। क्षेत्रवासियों ने बिजली विभाग के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी जमकर नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता अब जनता की समस्याओं से आंखें मूंदे बैठे हैं। लोगों का कहना है कि न तो निगम सुन रहा है और न ही नेता, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। गेहूं की कटाई के बाद किसान अब गन्ने और पशु चारे की बुवाई में जुटे हैं, जिसके लिए पानी की सख्त आवश्यकता है। किसान राजपाल सिंह, नीरज कुमार और बाबूराम ने बताया कि कई घंटों की कटौती के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। झबरेड़ा विद्युत उपखंड के एसडीओ रिजवान अहमद का कहना है कि बिजली की यह कटौती स्थानीय स्तर से नहीं, बल्कि रुड़की मुख्य केंद्र से ही रोस्टिंग होने के कारण हो रही है। आपूर्ति को सुचारू बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि विद्युत आपूर्ति में शीघ्र सुधार नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।





