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झबरेड़ा, 14 सितंबर। गाँव लाठरदेवा हुण स्थित प्राचीन भगवान श्री गणेश मंदिर में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। आधी रात 12 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह चार बजे तक भगवान गणेश के दर्शन, पूजा-अर्चना और प्रसाद चढ़ाने के लिए लंबी कतार लग गई। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश को प्रसाद अर्पित कर परिवार और क्षेत्र की सुख-शांति की कामना की।

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ग्राम पूर्व प्रधान संजय सिंह, पूर्व विधायक हरिदास तथा असाही ग्लास फैक्ट्री की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों और सेवादारों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। बारिश के बावजूद भंडारे में लोगों की भीड़ बनी रही।मेले में एक दिन पहले ही बड़ी संख्या में दुकानदार पहुंच गए थे। मिष्ठान, चाट, खिलौने, प्रसाद आदि की दुकानें सजाई गईं। बच्चों के लिए बड़े-बड़े झूले भी लगाए गए। सुबह से ही मेले में महिला, पुरुष और बच्चों की भीड़ जुटने लगी। दोपहर में बारिश शुरू होने से दुकानदारों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने मंदिर के बरामदों और आसपास के घरों में बारिश से बचने के लिए शरण ली। ग्रामीणों के अनुसार प्राचीन समय में देवबंद से रुड़की तक घना वन क्षेत्र था। दिल्ली का एक व्यापारी बैलगाड़ियों में सामान लेकर हरिद्वार जा रहा था। लाठरदेवा हुण के पास रात होने पर उसने यहां डेरा डाल लिया। भगवान गणेश के भक्त व्यापारी ने रात शांतिपूर्वक बीतने पर मंदिर निर्माण की मनौती मांगी। अगले दिन सकुशल हरिद्वार पहुंचने के बाद उसने यहां भगवान गणेश का मंदिर और लोगों के लिए पानी की व्यवस्था को कुआं बनवाया। बाद में वन क्षेत्र समाप्त होने और आसपास गांव बसने के बाद मंदिर परिसर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर मेले की परंपरा शुरू हुई। ग्रामवासी भागमल ,जितेंद्र ,सत्यपाल सिंह, अनूप सिंह, अंकित कुमार, अंशुल चौधरी, अनिरुद्ध चौधरी और शिवचरण आदि ने बताया कि मंदिर के प्रति क्षेत्र के लोगों में वर्षों से गहरी आस्था है और प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मेले में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह के दिशा-निर्देशन में पुलिस की विशेष व्यवस्था रही।





