झबरेड़ा 19 जुलाई। कस्बा झबरेड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गन्ना कोल्हू संचालकों और किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र प्रेषित कर गन्ना कोल्हूओं को लाइसेंस मुक्त करने और ऊर्जा निगम द्वारा बढ़ाए गए बिजली के बिलों को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की है।

क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि झबरेड़ा कस्बा और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में हर साल लगभग 50 गन्ना कोल्हू संचालित होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से गुड़ बनाने का काम किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, प्रत्येक कोल्हू में लगभग 15 मजदूर और किसान मिलकर काम करते हैं। इस तरह यह कोल्हू क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों के पालन-पोषण और आजीविका का एकमात्र सहारा हैं।मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में यशवीर सिंह, भोला सिंह, सुखबीर सिंह, रोहित कुमार, चरण सिंह, शमशाद अली, जुल्फिकार, वकील अहमद, बाबूराम, राजपाल सिंह, धर्मपाल सिंह, दिनेश कुमार ,पप्पू और राधिका सहित कई किसानों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। भाजपा सरकार एक तरफ तो आत्मनिर्भर बनने की बात कहती है और युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय दूसरों को रोजगार देने वाला काम करने की सलाह देती है। लेकिन दूसरी तरफ, जो किसान और मजदूर खुद का काम कर रहे हैं, उन पर भारी-भरकम बिजली बिल थोपकर परेशान किया जा रहा है। किसानों ने साफ कहा कि गन्ना कोल्हू कोई बड़ा उद्योग या फैक्ट्री नहीं है, बल्कि यह गरीब किसानों और मजदूरों का जीवन यापन करने का एक जरिया है। सरकार द्वारा प्रतिवर्ष इसके लाइसेंस के लिए चक्कर कटवाने और पिछले सत्र वर्ष 2025 में ऊर्जा निगम द्वारा बढ़ाए गए विद्युत बिल से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।किसानों ने मुख्यमंत्री धामी से गुहार लगाई है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गरीब मजदूरों के हित को देखते हुए गन्ना कोल्हूओं को पूरी तरह लाइसेंस मुक्त किया जाए और बढ़ा हुआ बिजली बिल तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, ताकि वे हर तरह के संकट से उबर सकें।





